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घुसपैठके मामलेमें पाकिस्तानसे आगे चीन

डोकलाम विवाद के बाद पहली बार भारत-चीन के बीच हुई सीमा वार्ता
नयी दिल्ली। पाकिस्तान भारतीय सीमामें बीच-बीचमें घुसपैठ कराता रह ता है। जब कि चीनने २५ से अधिक बार भारतीय सीमामें प्रवेश किया । भारतीय सैनिकोंके जोरदार विरोधके बाद चीनी अपनी सीमामें वापस लौटे। चीन लगातार डोकलाम क्षेत्रमें अपने सैनिकोकी वृद्धि करता रहा। चीन भारतसे वार्ताके साथ-साथ घुसपैठ कराकर दोहरा खेल खेल रहा है।डोकलाम में भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध के बाद  पहली बार दोनों देशों के बीच पेइचिंग में सीमा को लेकर वार्ता हुई. इसको लेकर भारतीय दूतावास एक बयान जारी किया जिसमें उसने कहा कि सीमा वार्ता रचनात्मक और आगे बढऩे वाली रही. यहां चर्चा कर दें कि डोकलाम में दोनों देशों के बीच करीब ढाई महीने तक सैन्य गतिरोध जारी रहा था. यही नहीं यहां हालात काफी तनावपूर्ण हो गये थे और दोनों ओर सैनिकों का जमवाड़ा लग रहा था. इस विवाद का अंत आखिरकार अगस्त महीने में हुआ. दोनों देशों के बीच यह बातचीत श्वर्किंग मकैनिजम फॉर कंसल्टेशन ऐंड कोऑर्डिनेशन ऑन इंडिया-चाइना बॉर्डर अफेयर्सश् (डबल्यूएमसीसी) के अंतर्गत हुई. इस सीमा वार्ता के बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होगी जो दिसंबर में होने की उम्मीद जतायी जा रही है. विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत का मेन मोटो सीमा विवाद को खत्म करने की संभावना निकालना है जबकि डबल्यूएमसीसी के तहत बातचीत का फोकस सीमाई इलाकों में शांति स्थापित करना होता है. भारत यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि चीन के सैनिक भूटान के नजदीक यानी भारत-चीन-भूटान के अहम त्रिकोण के करीब सड़क निर्माण का काम दोबारा न शुरू करे. सड़क निर्माण को लेकर ही दोनों देशों की सेना आमने-सामने आ गयी थी. भारतीय सैनिकों की आपत्ति के बाद चीनी सैनिकों ने सड़क निर्माण का काम बंद कर दिया था. भारतीय दूतावास की तरफ से जारी बयान में जानकारी दी गयी है कि दोनों ही देशों के अधिकारियों ने भारत-चीन सीमा के सभी सेक्टरों में हालात की समीक्षा की और दोनों ही पक्ष सीमाई इलाकों में शांति बनाये रखने पर यहमत नजर आये, जो द्विपक्षीय संबंधों में स्थायी विकास की एक अहम पूर्वशर्त रही है. बातचीत में भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रटरी (ईस्ट एशिया) प्रणय वर्मा और दूसरे अधिकारी शामिल थे, जबकि चीन की तरफ से एशियन अफेयर्स डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल जियाओ किआन और दूसरे अधिकारियों ने हिस्सा लिया. गौर हो कि डबल्यूएमसीसी की स्थापना 2012 में हुई थी और यह 10वें दौर की वार्ता थी. यह बातचीत ऐसे समय संपन्न हुई जब चीन के विदेश
मंत्री वांग यी अगले महीने नयी दिल्ली में होने वाले रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक में शिरकत करने भारत आने वाले हैं।
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कश्मीरमें आईएसने पसारे पांव
नयी दिल्ली (एजेंसी)।  दुनिया में इंसानियत के लिए खतरा बन चुके आतंकी संगठन आईएसआईएस ने भारत में भी अपनी जड़ें जमा ली हैं. कश्मीर में इस आतंकी संगठन का पहला ग्रुप तैयार हो गया है। ऐसा एक ट्विटर हैंडल में जारी किये गये वीडियो से पता चला है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस ट्विटर हैंडल को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। 23 अक्तूबर को एक ट्वीट किया गया था। यह ट्विटर हैंडल जैक मूसा का है। जैक मूसा ने अपने पेज पर आईएसआईएस के पोस्टर, बैनर लगाते हुए पहले ग्रुप की घोषणा की थी।  जैक मूसा ने 'बयाह फार्म कश्मीर Ó  नामक एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें इस्लामिक स्टेट की विचारधारा को कश्मीर में फैलाने की बात कही गयी है। रक्षा सूत्रों से मिली जानाकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को एक ऐसा ट्विटर हैंडल हाथ लगा था जिसमें एक वीडियो के माध्यम से यह दावा किया गया कि कश्मीर में आईएसआईएस का पहला ग्रुप तैयार हो गया है। कश्मीर के युवाओं और वहां फैले आंतकियों का उन्हें पूरा समर्थन मिल रहा है।  सुरक्षा जांच एजेंसियों ने इस ट्विटर हैंडल को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है और इस दिशा में अपनी जांच तेज कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे ट्विटर हैंडल पर नजर रख रही हैं जो कश्मीर के युवाओं को गुमराह करने के लिए पोस्ट जारी करते हैं। गृह मंत्रालय ने इस तरह के खतरे से निपटने के लिए काउंटर टेररिज्म और काउंटर रेडिकलाइजेशन (सीटीसीआर) और साइबर एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी (आईसीएस) नामक दो विशेष प्रभागों की स्थापना की है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ट्विटर हैंडल के अलावा इस दावे को कश्मीर के युवा फुटबॉल खिलाड़ी माजिद अरशिद खान द्वारा आतंकी संगठन में शामिल होना और पुख्ता करता है। हालांकि माजिद ने आतंक का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। फिर भी यह घटना इस बात की तरफ इशारा करती है कि यहां के नौजवानों को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए भड़काया जा रहा है।