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महाराष्ट्र : सरकार गठन में पवारकी गुगली

सोनियासे एनसीपीकी बैठकके बाद उद्धवकी बढ़़ी मुश्किलें
नयी दिल्ली/मुंबई(एजेंसी)। महाराष्ट्र की राजनीति के चतुर खिलाड़ी कहे जाने वाले शरद पवार सरकार बनाने के लिए बैटिंग कर रही शिवसेना को अपनी 'गुगलीÓ से चित कर सकते हैं। एनसीपी, कांग्रेस के साथ सरकार गठन के मंसूबे पाल रही शिवसेना की चिंताएं शरद पवार ने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद और बढ़ा दीं। कहा तो जा रहा था कि सोनिया से पवार मुलाकात के बाद सरकार का रास्ता साफ होगा, लेकिन जब वह मीटिंग से लौटे तो यह कह कर सस्पेंस गहरा कर दिया कि हमारा शिवसेना के साथ कोई कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय नहीं हुआ है। यही नहीं शिवसेना को सरकार बनाने के लिए कोई भरोसा देने की बात से भी उन्होंने इनकार किया। उनके इस बयान के बाद से अब एक बार फिर से राज्य में नए समीकरणों को लेकर चर्चा हो रही है। राजनीतिक हलकों में एनसीपी के डबल गेम की चर्चाएं होने लगीं हैं। मतलब एक तरफ शरद पवार शिवसेना और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को लेकर कुछ भी स्पष्ट रूप से कहने से बच रहे हैं। दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से संसद में एनसीपी की तारीफ किए जाने से उनके बीजेपी संग जाने की भी चर्जाएं हैं। इसके अलावा एनडीए के सहयोगी आरपीआई के नेता रामदास आठवले के फॉम्र्युले को लेकर अब यह भी कहा जाने लगा है कि शिवसेना एक बार फिर से बीजेपी के साथ आ सकती है। भले ही महाराष्ट्र में सरकार गठन के सवाल का जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है, लेकिन जो भी जवाब होगा, उसके केंद्र में शरद पवार जरूर हो सकते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी बेहद बारीकी से और संकेतों के जरिए बड़ी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। सोमवार को भी राज्यसभा के 250वें सत्र के पहले दिन उन्होंने एनसीपी को अनुशासित पार्टी बताते हुए सराहना की और कहा कि उनके सांसद कभी वेल में नहीं आते। बात तो उन्होंने राज्यसभा में एनसीपी के व्यवहार को लेकर कही, लेकिन इसके मायने दूर तक तलाशे जाने लगे। कहा जा रहा है कि उन्होंने यह कहकर एक तरह शिवसेना पर दबाव बढ़ाने का प्रयास किया है कि बीजेपी भी एनसीपी के संपर्क में है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा कहकर पीएम मोदी ने शिवसेना को यह संकेत देन की कोशिश की है कि यदि वह अब भी चाहे तो लौट सकती है वरना एनसीपी भी हमारे लिए विकल्प हो सकती है।