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राम जन्मभूमि साबित करनेके लिए आस्था ही काफी-रामलला विराजमान

अयोध्या भूमि विवाद मामला
नयी दिल्ली (आससे.)। उच्चतम न्यायालय में अयोध्या के चर्चित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले की सुनवाई आज भी जारी रही। रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि आस्था ही यह साबित करने के लिये काफी है  कि विवादित जगह राम जन्मभूमि है, फिर भले ही वहां मंदिर रहा हो या नहीं।
मामले की सुनवाई कर रही उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने आज भी अपनी दलील जारी रखी। उन्होंने कहा कि लोगों की आस्था ही यह साबित करने के लिये काफी है कि विवादित जगह राम जन्मभूमि है, भले ही वहां मंदिर रहा हो या नहीं। वैद्यनाथन ने कहा कि हिन्दुओं ने हमेशा ही उस स्थान पर पूजा करने की अपनी इच्छा जाहिर की है। यह जगह एक देवता राम की जन्मभूमि है। अब इसका तो सवाल ही नहीं उठता है कि कोई वहां मस्जिद बना दे और जमीन पर दावा करे। किसी आराध्य और किसी देवता को कभी खंडित नहीं किया जा सकता है। अगर वहां अब मंदिर नहीं है तो इससे भी उसकी पवित्रता खत्म नहीं होती, वह हमेशा बनी रहेगी। भूमि के मालिकाना हक का दावा कोई नहीं कर सकता। कोई भी मस्जिद के आधार पर इस संपत्ति पर अपने कब्जे का दावा नहीं कर सकता। मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय विवादित स्थल की २.७७ एकड़ जमीन से जुड़े विवाद पर सुनवाई कर रहा है। २०१० में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक फैसले में इस जमीन को तीन हिस्सों में बंटाकर सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान को इसका मालिक बताया था। जिसके बाद सभी पक्षों ने याचिका दाखिल कर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।