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जस्टिस बोबड़े बने भारतके ४७वें मुख्य न्यायाधीश

नयी दिल्ली(आससे)। न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबड़े ने आज भारत के ४७वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद की शपथ दिलायी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के रविवार को सेवानिवृत्त हो जाने के बाद जस्टिस बोबड़े मुख्य न्यायाधीश बने हैं। राष्ट्रपति भवन सचिवालय ने बताया कि आज राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबड़े ने राष्ट्रपति के समक्ष भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। न्यायमूर्ति बोबड़े का कार्यकाल २३ अप्रैल-२०२१ को समाप्त होगा। न्यायमूर्ति बोबड़े को १२ अप्रैल २०१३ को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। जस्टिस बोबड़े देश के सबसे बड़े अयोध्या विवाद का फैसला सुनाने वाली पांच जजों की पीठ का हिस्सा रहे, इसके अलावा जस्टिस बोबड़े और भी कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला देने वाली पीठ का हिस्सा रह चुके हैं। जस्टिस बोबड़े का जन्म २४ अप्रैल १९५६ को नागपुर में हुआ। उनके पिता नामी वकील थे। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कला एवं कानून में स्नातक किया। १९७८ में महाराष्ट्र बार काउंसिल में उन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन कराया और उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में २१ साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद जस्टिस बोबड़े ने मार्च २००० में बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज बने। १६ अक्टूबर २०१२ को वह मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय के चीफ  जस्टिस और १२ अप्रैल २०१३ को उच्चतम न्यायालय के जज बने।