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डिजिटल भुगतानमें व्यापारियोंको राहत

आरबीआईने रेपो रेट ०.२५ फीसदी घटाया,सभी तरहके कर्ज होंगे सस्ते
मुंबई (एजेंसी)। रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने गुरुवार को ब्याज दरों का ऐलान किया। रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती की गयी है। यह 6 फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी हो गया है। आरबीआईने आम कारोबारियोंको राहत देते हुए एनईएफटी , आरटीजीएस पर बैंक शुल्क समाप्त कर दिया है।  रेपो रेट में कमी से सभी तरह के लोन सस्ते होंगे।  हालांकि, यह बैंकों पर निर्भर करता है कि वे रेपो रेट में कमी का फायदा ग्राहकों को कब तक और कितना देते हैं। रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई कॉमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहली मौद्रिक समीक्षा बैठक थी। आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पडऩे से आरबीआई पर ब्याज दर में कटौती का दबाव बढ़ गया था। मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 5.8 फीसदी रह गयी। पूरे वित्त वर्ष (2018-19) में विकास दर 6.8 फीसदी रही। यह पांच साल में सबसे कम है। ऐसे में केंद्रीय बैंक की कोशिश है कि सस्ते कर्ज के जरिए बाजार में नकदी बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज की जाये। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने मौद्रिक नीति को लेकर नजरिया न्यूट्रल से बदलकर अकोमोडेटिव (उदार) कर दिया है। यानी ब्याज दर में आगे और भी कटौती की जा सकती है। रिजर्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष (2019-20) में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। अप्रैल की बैठक के बाद 7.2 फीसदी का अनुमान जारी किया था। रिजर्व बैंक ने अप्रैल से सितंबर की छमाही में महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 3-3.1 फीसदी कर दिया है। अप्रैल में 2.9 से 3 फीसदी की उम्मीद जताई थी। ब्याज दरें तय
करते वक्त आरबीआई खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। यह लगातार आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। अप्रैल में यह 2.92 फीसदी रही थी। शक्तिकांत दास के गवर्नर बनने के बाद लगातार तीसरी बार रेपो रेट घटा है। अप्रैल और फरवरी की समीक्षा बैठकों के बाद भी 0.25-0.25 फीसदी की कटौती की गयी थी। फरवरी में दास की अध्यक्षता में आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की पहली समीक्षा बैठक हुई थी। उर्जित पटेल के इस्तीफा देने के बाद दास ने दिसंबर 2018 में आरबीआई के गवर्नर का पद संभाला था।
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 कैटने एनईएफटी,आरटीजीएसपर बैंक शुल्क समाप्त करनेका किया स्वागत
नयी दिल्ली (आससे)। कारोबारियों के अखिल भारतीय संगठन कैट ने रिजर्व बैंक द्वारा एनईएफटी और आरटीजीएस पर बैंक शुल्क को समाप्त करने की घोषणा का स्वागत किया है। कैट ने कहा है कि यह एक प्रगतिशील कदम है। कैट ने एक बयान में कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने एनईएफटी और आरटीजीएस पर बैंक शुल्क को समाप्त किये जाने से कारोबारी समुदाय डिजिटल भुगतान के अधिक उपयोग के लिये प्रोत्साहित होगा। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस कदम से उद्योग और अन्य क्षेत्रों के साथ देश में लगभग ढाई करोड़ व्यापारियों को फायदा मिलेगा। खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन को पूरा करने के लिये डेबिट या के्रडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान पर लगाये गये बैंक शुल्क को भी समाप्त किया जाना चाहिये। इससे न केवल कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आम लोगों को भी डिजिटल  भुगतान अपनाने के लिये प्रेरणा मिलेगी। इस व्यवस्था से देश में नकदी कारोबार बड़े स्तर पर समाप्त हो जायेगा तथा समानांतर अर्थव्यवस्था पर अंकुश लगेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कार्ड से भुगतान पर बैंक शुल्क सीधे बैंकों को देना चाहिये। साथ ही यह भी सुझाव दिया कि डिजिटल भुगतान अपनाने पर सरकार की तरफ से कुछ प्रकार के प्रोत्साहनों की घोषणा की जानी चाहिये।