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भारतरत्न अटल बिहारीका तिरोधान

'अटल' युगका अंत,सात दिनका राष्ट्रीय शोक,देशभरमें शोककी लहर
नयी दिल्ली(आससे)। देश में गैर कांग्रेसी राजनीति के सहारे सत्ता हासिल करने का इतिहास रचने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। एम्स प्रशासन ने उनकी निधन की घोषणा करते हुये बताया कि वाजपेयी ने शाम ५.०५ बजे अंतिम सांस ली। उनकी निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर फैल गयी है।  आज शाम एम्स प्रशासन द्वारा जारी बयान में बताया गया कि बड़े दुख के साथ हम सूचित कर रहे हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का १६ अगस्त २०१८ को शाम ५.०५ बजे निधन हो गया। एम्स के मीडिया और प्रोटोकाल विभाग की अध्यक्ष डा. प्रो. आरती विज ने बयान में कहा कि श्री वाजपेयी को ११ जून २०१८ को एम्स में भर्ती किया गया था और पिछले ९ सप्ताह से एम्स के डाक्टरों की एक टीम की निगरानी में उनकी हालत स्थिर बनी हुयी थी। दुर्भाग्य से पिछले ३६ घंटों से उनकी हालत खराब होती गयी और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था। काफी प्रयास के बावजूद हमने आज उन्हें खो दिया। इस बड़ी क्षति के कारण हम शोक में डूबे राष्ट्र के साथ हैं।  इससे पहले १५ अगस्त को एम्स प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य का बुलेटिन जारी किया, जिसमें कहा गया था कि पिछले ९ सप्ताह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एम्स में इलाज के लिये भर्ती किया गया है। एम्स के मीडिया और प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष डा. प्रो. आरती विज द्वारा जारी बुलेटिन में बताया गया था कि दुर्भाग्य से पिछले २४ घंटे के दौरान उनकी हालात खराब हो गयी है। उनकी स्थिति गंभीर है और वह जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं। आज सुबह जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में भी बताया गया कि वाजपेय की हालत पहले जैसी ही है, वह बेहद गंभीर हैं और जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं। बुधवार को मेडिकल बुलेटिन जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एम्स पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। आज बुलेटिन जारी होने के बाद सुबह से ही एम्स में प्रधानमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों तथा पक्ष व विपक्ष के नेताओं व मुख्यमंत्रियों का तांता लग गया। स्वास्थ्य जानकारी लेकर बाहर निकले कई नेताओं की आंखें नम थीं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी वाजपेयी की पहचान एक महान राजनेता के अलावा हिन्दी कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता के रूप में रही है। भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले राजनेताओं में से एक वाजपेयी १९६८ से १९७३ तक इसके अध्यक्ष भी रहे और जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थल बटेश्वर के मूल निवासी पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। वहीं पर शिंदे की छावनी में २५ दिसम्बर १९२४ को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। उनकी माता का नाम कृष्णा वाजपेयी था। पिता हिन्दी व ब्रज भाषा के कवि थे। संभवत: उनकी वजह से अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कविता लिखने का गुण प्राप्त किया। उनकी स्नातक की शिक्षा ग्वालियर के लक्ष्मी बाई कालेज में हुयी। छात्र  जीवन से ही वह राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ के स्वयं सेवक बने। वाजपेयी के व्यक्तित्व निर्माण में कानपुर के डीएवी कालेज का भी योगदान रहा। यहां से उन्होंने एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ में कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई की। लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वह पूरी निष्ठा के साथ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में संघ के कार्य में जुट गये।  राजनीति के साथ-साथ वाजपेयी ने पत्रकारिता को अपना कैरियर बनाया और वीर अर्जुन, पांचजन्य, राष्ट्रधर्म

तथा दैनिक स्वदेश जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से अपनी धारदार लेखनी से देश की राजनीति को प्रभावित करने का काम कुशलता पूर्वक किया। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान तथा असाधारण भूमिका के लिये वर्ष २०१४ में उन्हें भारत रत्न  से नवाजा गया। अटल बिहारी वाजपेयी देश के पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने जिन्होंने बतौर प्रधानमंत्री पूरे पांच साल तक सरकार चलायी। इससे पहले देश की राजनीति में यह काम कोई भी बड़ा नेता नहीं कर पाया था। वाजपेयी देश के पहले ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने पहली बार गठबंधन की सरकार बनायी। उन्होंने न सिर्फ  सरकार बनायी, बल्कि दो दर्जन से अधिक दलों को साथ लेकर देश की राजनीति में गैर कांग्रेसवादी सरकार का सफल प्रयोग भी किया। उनके इस सफल प्रयास ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिये बदलकर एक नया इतिहास दर्ज कराया। २८ वर्ष की उम्र में संसद पहुंचे थे। लोकसभा में कश्मीर मुद्दे को वाजपेयी ने ओजस्वी भाषण देकर उठाया। उनके इस भाषण से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू संसद में ही कहा कि एक दिन वाजपेयी जरूर प्रधानमंत्री बनेंगे। १९९६ में पंडित नेहरू की यह भविष्यवाणी सच साबित हुई और वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। अटल बिहारी वाजपेयी इतने चर्चित और लोकप्रिय थे कि वह पहले ऐसे सांसद बने, जिन्हें चार राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली से चुना गया था। उनके नाम दर्ज इस कीर्तिमान को आज तक कोई नेता नहीं तोड़ पाया है। वाजपेयी को उनके हिन्दी भाषा के प्रति लगाव के लिये भी याद किया जाता है। पहली बार मोरारजी देसाई की सरकार में उन्होंने बतौर विदेश मंत्री और फिर बतौर प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा को हिन्दी में संबोधित करके देश के मान-सम्मान को एक नयी ऊंचाई पर पहुंचाया। वाजपेयी ने १९५५ में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और हार गये।  १९५७ में गोंडा के बलरामपुर से वह जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। १९५७ से १९७७ में जनता पार्टी की स्थापना तक लगातार जनसंघ संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में १९७७ से १९७९ तक वाजपेयी विदेश मंत्री रहे। १९८० में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर उन्होंने सरकार से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। ६ अप्रैल १९८० को मुंबई में पहली बार भाजपा का गठन हुआ और वाजपेयी इसके अध्यक्ष बने। वह दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुये। वह १९९६ में १३ दिन, १९९८ में १३ महीने और १९९९ में पांच साल प्रधानमंत्री रहे। प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी ने ११ और १३ मई १९९८ को पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस काम ने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मंच पर एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। वाजपेयी ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिये १९ फरवरी १९९९ को दिल्ली से लाहौर तक बस से यात्रा की, लेकिन कुछ ही महीने  बाद तत्कालीन पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना ने करगिल में घुसपैठ कर दी। इस लड़ाई में भारत की जीत ने वाजपेयी की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ा दिया। वाजपेयी को सड़क निर्माण और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के लिये भी याद किया जाता है। वह आजीवन अविवाहित रहे। ९४ वर्षीय वाजपेयी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले ९ सप्ताह से वह एम्स में इलाज के लिये भर्ती थे, जहां डाक्टर नीरज गुलेरिया के नेतृत्व में डाक्टरों की एक टीम उनके इलाज में जुटी हुयी थी। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद आज काल के कपाल पर लिखने-मिटाने वाली वह अटल आवाज हमेशा के लिये खामोश हो गई।