Tel: 0542 - 2393981-87 | Mail: ajvaranasi@gmail.com


सीबीआईमें भ्रष्टाचारपर घमासान

पीएमओ चिंतित,प्रधान मंत्रीने दो शीर्ष अफसरोंको किया तलब
सीबीआईके पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र कुमार गिरफ्तार
नयी दिल्ली (आससे)। देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई के आला अधिकारियों की करतूतों से प्रधानमंत्री कार्यालय बेहद खफा हो गया है। जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत के आरोपों पर जांच एजेंसी के पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र कुमार को आज जहां गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीबीआई के निदेशक और उप प्रमुख को तलब किया है।  सरकार का मानना है कि जिस तरीके से सीबीआई के आला अधिकारी एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं और मामला गिरफ्तारी तक पहुंचा है, उससे जनता के बीच गलत संदेश चला गया है। जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गयी, उससे सरकारी अमला हैरान है। मालूम हो कि नये कानून के मुताबिक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले इजाजत लेना जरूरी होता है। गौरतलब है कि एक अप्रत्याशित कदम के तहत सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ यह आरोप लगाते हुये मामला दर्ज किया है कि मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े एक मामले में जांच कर रहे अस्थाना ने रिश्वत ली है। लगभग दो महीने पहले २४ अगस्त को एक पत्र लिखकर अस्थाना ने कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ शिकायत की थी। पत्र में उन्होंने वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के १० मामले गिनाये थे। साथ ही यह भी आरोप लगाया था कि साना ने इस मामले में क्लीनचिट पाने के लिये वर्मा को दो करोड़ रुपये  दिये हैं। सीबीआई ने सतीश साना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ तीन करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुये प्राथमिकी दर्ज की। मांस कारोबारी मोईन कुरैशी की कथित संलिप्तता से जुड़े २०१७ के एक मामले में जांच का सामना कर रहे साना ने आरोप लगाया है कि अस्थाना ने उसे क्लीनचिट
दिलाने में कथित रूप से मदद की है। बता दें कि अस्थाना ही कुरैशी के खिलाफ जांच की कमान संभाल रहे थे। अस्थाना ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुये सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा पर फंसाने का आरोप लगाया है। चर्चा है कि दोनों अधिकारियों के बीच पावर के लिये भी जोर आजमाइश चल रही है। अस्थाना की शिकायत पर सीवीसी मामले की जांच कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि मोईन कुरैशी के मांस करोबार से जुड़े जिस भ्रष्टाचार मामले में अस्थाना पर घूस लेने का आरोप लगा है, उसी मामले में पहले भी सीबीआई के दो निदेशक जांच के दायरे में हैं। पूर्व सीबीआई निदेशक एपी सिंह के कुछ मोबाइल संदेश ट्रैक किये गये थे और एक अन्य पूर्व निदेशक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। भ्रष्टाचार का यह मामला पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के समय का है। बहरहाल, सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच रिश्वतखोरी को लेकर शुरू हुयी इस लड़ाई के सार्वजनिक होने के बाद अब जांच एजेंसी के सबसे विश्वसनीय होने के दावे पर भी प्रश्नचिन्ह उठ खड़े हुये हैं। चूंकि सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री के अधीन काम करती है, इसलिये इस लड़ाई से पीएमओ की साख पर भी आंच आयी है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज इस मामले में हस्तक्षेप करते हुये दोनों अधिकारियों को तलब किया है।