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गौ, गंगा और संस्कृतसे ही संस्कृतिकी रक्षा-महन्त नरेन्द्र गिरि

राष्ट्र के संस्कृति की रक्षा करनी है तो गौ, गंगा तथा संस्कृत की रक्षा करनी होगी। करपात्री जी महाराज सदैव इन तीनों के लिए मुखर रहे, और उसी का प्रतिफल है कि सनातनी संस्कृति अक्षुण्य बनी हुई है। उक्त विचार अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त नरेन्द्र गिरी जी महाराज ने सोमवार को दुर्गाकुण्ड स्थित धर्मसंघ में आयोजित १११ वें करपात्र प्राकट्योत्सव में व्यक्त किये। धर्मसंघ शिक्षा मण्डल के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय प्राकट्योत्सव के नवें दिन प्राकट्य दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि नरेन्द्र गिरी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम दो गाय जरूर पाले तथा कोई भी सनातनी हिन्दू गाय का विक्रय ना करे, गौसेवा से बड़ा कोई धर्म नही, यही हमारी संस्कृति है। संस्कृत भाषा की महत्ता बताते हुए कहा कि आज बड़े - बड़े विद्वान अपने बच्चों को संस्कृत की शिक्षा ग्रहण करने के लिए आगे नही कर रहे, लोग भूल रहे है कि संस्कृत से ही संस्कृति है। इसलिए संस्कृत की शिक्षा को बल प्रदान किया जाये, तभी संस्कृति की रक्षा हो सकेगी। गंगा के सन्दर्भ में नरेन्द्र गिरी ने कहा कि गंगा के लिए अब तक अनगिनत रूपये खर्च हो चुके, जबकि गंगा की स्थिति अत्यन्त खराब होती जा रही है। हमें यह समझना होगा की हमारी वैश्विक पहचान की बड़ी वजह गंगा भी है, उसके भी संरक्षण के लिए सबको एकजुट होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रम्हचारी जी महाराज ने कहा कि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज सनातन धर्म के हस्ताक्षर थे, उन्होंने अपना सर्वस्व जीवन सनातन धर्म, शास्त्रों एवं मन्दिरों के रक्षार्थ समर्पित कर दिया था। काशी विद्यापीठ के वाइसचांसलर प्रोफेसर टी.एन. सिंह ने कहा कि धर्मसंघ स्वामी करपात्री जी के आदर्शो पर चल रहा है। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के वाइसचांसलर प्रोफेसर राजाराम शुक्ल ने कहा कि धर्म सम्राट द्वारा दिया गया नारा अपने आप में सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण को इंगित करता है। क्योंकि विश्व का कल्याण तभी होगा जब प्राणियों में सद्भावना होगी। धर्मसंघ के मंत्री डाक्टर श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि करपात्री जी महाराज का मूलमंत्र था कि धर्म सापेक्ष, पक्षपात विहिन राज्य हो तथा प्रत्येक को अपने धर्म के पवित्र धर्मग्रन्थ के अनुसार धर्माचरण की स्वतंत्रता हो, आज इसी मंत्र का अनुसरण करने की आवश्यकता है। इससे पूर्व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शिवदत्त शर्मा चतुर्वेदी को अतिविशिष्ट करपात्र रत्न सम्मान से अंलकृत किया गया। साहित्य के विद्वान प्र्रोफेसर शर्मा को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी जी महाराज, धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी  एवं जगजीतन पाण्डेय ने माल्यार्पण, अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र, श्रीफल एवं एक लाख रूपयें का ड्राफ्ट प्रदान किया। इसके अलावा एक अन्य विद्वान डाक्टर रजनीश शुक्ल को करपात्र गौरव सम्मान से नवाजा गया। उन्हें स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र एवं ग्यारह हजार रूपये का ड्राफ्ट प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्राकट्योत्सव के अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा करने वालें महानुभावों को करपात्र मणि सम्मान से नवाजा गया। जिसमें चिकित्सामणि डाक्टर के.के त्रिपाठी, डाक्टर प्रेमवती तिवारी, डाक्टर एस.के पाठक, शिक्षामणि डाक्टर गिरीश त्रिपाठी एवं डाक्टर प्रिति त्रिवेदी, विधिमणि विधुशेखर मिश्र, संगीतमणि कन्हैया दूबे एवं ममता टण्डन, क्रीडामणि आस्था वर्मा, नन्दनी सरकार व धु्रव पाण्डेय, सेवामणि पूनम राय एवं राधेमोहन झा, व्यवसायमणि काशी नटनियादायी व्यापार मण्डल एवं गोपाल मिश्र, लेखामणि आर.पी. पाण्डेय, लोकमणि जितेन्द्र किरण जादूगर, पर्यावरणमणि रमेश केशरवानी एवं मोहन यादव को प्रदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा धर्मसम्राट के चित्र पर माल्र्यापण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्राकट्योत्सव में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री नारायण जी व्यास, चन्द्रमा पाण्डेय, धनंजय पाण्डेय, उपेन्द्र त्रिपाठी, रामपूजन पाण्डेय रामरक्षा त्रिपाठी, दयानिधि मिश्र, गायत्री प्रसाद पाण्डेय आदि विद्वतजन विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर उपेन्द्र पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन राजमंगल पाण्डेय ने दिया। इस अवसर पर नवीन दूबे, कृष्णमोहन पाण्डेय, सुनील शुक्ला, सुबोध त्रिपाठी, रवीन्द्र सिंह आदि ने सहयोग किया।
सांयकाल बही भजनोंकी बयार
करपात्र प्राकट्योत्सव पर विख्यात गायक भरत शर्मा व्यास एवं आस्था शुक्ल ने भजनों की बयार से धर्मसंघ परिसर को भक्तिमय बना दिया। भरत शर्मा ने निमिया के डारी मईया झूलेली झूलनवा, जीभ लटकल होई मुण्ड क माला, जेकर राम ना बिगडि़हे केहू का बिगाड़ी आदि भजनों से सबकों मंत्रमुग्ध कर दिया। आस्था शुक्ला ने देश भक्ति गीतों की बयार बहायी, उन्होंने ऐ मेरे वतन के लोगों, जहॉ डाल-डाल पे चिडिय़ा करती है बसेरा आदि गीतो की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन कन्हैया दूबे के.डी ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया गया।  
पोती-पोताने दी दादा को स्वरांजलि
रुपवाणी और काशीसुर धरोहर के संयुक्त तत्वावधान में विवेकानन्द शिक्षण संस्थान में पण्डित मोहन मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। सर्वप्रथम पण्डित मोहनलाल मिश्र के पोते कृष्णा और और पोती खुशी ने भजन गाकर अपने दादा को स्वरांजलि अर्पित की। तत्पश्चात सितार वादक पंडित देवव्रत मिश्र ने अपने सितार कार्यक्रम राग सरस्वती में आलाप, जोड़, झाले से प्रारंभ किया। इसके पश्चात  झपताल में गत की प्रस्तुति की  और अंत में  तीन ताल में। कार्यक्रम का समापन उन्होंने  एक पहाड़ी धुन से किया । तबले पर संगत किया श्री प्रशांत मिश्र ने। इस कार्यक्रम के पश्चात मंच संभाला पंडित मोहनलाल मिश्र जी के सुपुत्र श्री प्रकाश मिश्र एवं श्री दीपक मिश्रा ने। राग-मियां मल्लहार में बिलंम्बित, कताल.मोरवा बोलन लागी, मध्य  तीनताल कि रचना बरसन लागी बदरिया तत्पश्चात दुत, कताल बूंदन बरसा, मेहरवा तीनताल में निबद्ध तराना उसके बादभजन-राग मिश्र शिवरंजनी में स्वामी रैदास द्वारा रचित प्रभु जी तुम चंदन हम पानी। इनके साथ तबले पर बनारस के जाने-माने तबला वादक पंडित कुबेरनाथ मिश्र ने बखूबी संगठित किया तथा हारमोनियम पर श्री सुरेश मिश्र ने साथ दिया। इस अवसर पर बनारस के विद्या सितार वादक विश्वनाथ मिश्र तबला वादक पंडित कामेश्वर नाथ मिश्र हारमोनियम वादक पंडित कांता प्रसाद मिश्र एवं २०१८ के बिस्मिल्लाह खान अवार्ड के लिए नामित बनारस के निदेशक उमेश शुक्ला और कार्यक्रम के संयोजक आशीष मिश्रा सहित तमाम संगीत प्रेमी उपस्थित थे।
ध्वजारोहण कल
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर परिसर स्थित मुख्य भवन के समक्ष पूर्वाह्नï ९.३० बजे ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस आयोजन में सभी अध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य है। यह जानकारी रजिस्ट्रार राजबहादुर ने दी।
गर्भाशयके कैंसरसे बचावके लिए किया जागरूक
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय सर सुन्दरलाल चिकित्सालय के ओ.पी.डी. नम्बर ११७ के प्रशिक्षण कक्ष में सोमवार को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडोलसेंट हेल्थ एंड डेवलपमेंट नयी दिल्ली के सहयोग से महिलाओं एवं किशोरियों में होने वाले गर्भाशय के कैंसर जे कारण,लक्षण एवं बचाव पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर नोडल आफिसर डॉक्टर मधु जैन एवं डॉक्टर तुलिका राय ने गर्भाशय के कैंसर एवं इससे बचाव के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के विषय में अवगत कराते हुए इससे सम्बंधित विडियो दिखाया । इस मौके पर ५४ किशोरियों का निरूशुल्क टीकाकरण किया गया। कार्यक्रम में डाक्टर जेे.एस. यादव, चमेली, कल्याणी वर्मा, अरुण कुमार, मजाहिर अब्बास एवं देवेन्द्र यादव आदि उपस्थित थे।
अद्र्घनारीश्वर हुए बाबा, भक्तों पर बरसाया अनुराग
श्रावण मास के तीसरे सोमवार पर भी काशी का रंग आस्था से सराबोर दिखा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्घा का सैलाब उमड़ा तो सबकुछ केसरिया होने में देर नहीं लगी। अटूट गंगधार से सराबोर काशी पुराधिपति के दर्शन को ललायित भक्तों की कतार देर रात तक एक छोर से दूसरे छोर तक लगी हुई थी। रविवार रात से दूसरे दिन तक आलम यहा था कि सड़क से लेकर मंदिर जाने वाले मार्गों तक कांवरियों की ठसाठस भीड़ थी और बाबा का जलाभिषेक करने का उत्साह उनमें हिलारे मार रहा था। इस बीच तीसरे सोमवार को परंपरा अनुसार सायंकाल बाबा का अद्र्घनारीश्वर श्रृंगार सजा तो झांकी के दर्शन और काशी पुराधिपति के अनुराग से भक्त निहाल हो गये। इसको अपनी आंखों में भर लेने की उनमें होड़ लगी हुई थी।इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही और पुलिसकर्मियों के साथ अधिकारी पूरी व्यवस्था पर नजर बनाये हुए थे।
भोर में मंगला आरती के बाद आम भक्तों के दर्शन के लिये मंदिर के पट खोल दिये गये। द्वार खुलते ही हर-हर महादेव, बोल बम के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजयमान हो गया। कांवरियों के साथ अन्य भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया और सुख-समृद्घि के लिये प्रार्थना की। इससे पहले रविवार रात से ही कांवरियों का जत्था शिविरों की बजाय घाटों पर उमड़ पड़ा। डाक्टर राजेंद्र प्रसाद घाट, शीतला घाट, दशाश्वमेध घाट सहित अन्य घाटों पर उनकी भीड़ उमड़ी रही। बच्चे, बूढ़े और महिलाओं की भी काफी संख्या रही। पात्रों में गंगाजल लेकर उनका कतारों में लगने का सिलसिला रविवार सायंकाल से दूसरे दिन रात तक अनवरत चलता रहा। बैरिकेडिंग में वह पाठ और बाबा का नाम सिमरन करते दिखे। बारिश नहीं होने और उमस के कारण उन्हें थोड़ी असुविधा हुई, लेकिन शिविरों के स्वयंसेवकों की ओर से शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा था। इस बीच दर्शन-पूजन निर्बाध तरीके से चलता रहा और धक्कामुक्की, कहासुनी की भी कम शिकायतें आई। हालांकि गर्भगृह में भीड़ ज्यादा होने के कारण भक्तों को चंद सेकेंड ही दर्शन के लिये मिल रहे थे। इस बीच दिन में भोग आरती के दौरान गर्भगृह के पट एक घंटे बंद रहे और इस दौरान झांकी दर्शन कराया गया। जलाभिषेक का सिलसिला आरती बाद शुरू हुआ तो सप्तर्षि आरती तक चला। इसके बाद श्रृंगार आरती में बाबा के शिव-पार्वती रूप की झांकी सजाई गई। इसका दर्शन गर्भगृह के बाहर से कराया गया और भक्तों की होड़ लगी हुई थी। पूरे दिन स्थानीय और नेमी भक्तों के बीच अलग-अलग प्रवेश द्वारों से आने-जाने को लेकर किचकिच का दौर जारी रहा। इसके बावजूद क्षेत्रीय और नेमी भक्तों को प्रवेश मिला। रात्रि शयन आरती में भी लोगों की काफी भीड़ रही। अधिकारियों की टीम व्यवस्था में सुधार के लिये लगी हुई थी। उनका लगातार राउंड लेने का सिलसिला जारी रहा और दर्शन-पूजन निर्बाध तरीके से चलता रहा।
सौ डाक बम और कई दिव्यांगों-बुजुर्गों बिना कतार दर्शन
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को सौ से ज्यादा की संख्या में डाक बम पहुंचे और उन्होंने बाबा का जलाभिषेक किया। इन्हें ढुंढिराज गणेश द्वार, मुख्य द्वार से होते हुए प्रवेश दिया गया। इसके अलावा बुजुर्गों और दिव्यांगों को भी बिना कतार दर्शन कराने की व्यवस्था की गई थी। इनकी संख्या भी काफी रही और दर्शन मिलने के बाद इनके चेहरे खिल गये। डाक बम को दर्शन के बाद प्राथमिक चिकित्सा, फलहारी आदि भी शिविर के स्वयंसेवकों की ओर से उपलब्ध कराया गया।
शिविरों की भूमिका अहम
काशी आये कांवरियों और आम भक्तों की सेवा में शिविरों का काफी योगदान रहा। उन्होंने भक्तों की आवभगत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कार्यालयों से छुट्टïी लेकर, दूकानें बंद करके वह रविवार रात से ही कांवरियों और अन्य भक्तों की सेवा में लगे रहे। उन्हें पेयजल, फलहारी, चिकित्सा और उनकी मरहम-पट्टïी आदि की व्यवस्था उन्होंने कर रखी थी। इसके कारण दूर दराज से आये कांवरियों को काफी सुविधा रही और उन्होंने इसकी सराहना भी की।
गुरुबाग तक लगी लाइन
श्रावण मास के तीसरे सोमवार को भक्तों के साथ कांवरियों की कतारों ने नया रेकार्ड बना दिया और इनकी कतार गुरुबाग तक पहुंच गई थी। यह स्थिति तड़के काफी देर तक थी। घंटों कतारों में रहने के बावजूद भक्तों का उत्साह देखने को मिला और बाबा का नाम जपते रहे। इस दौरान सहायता शिविर के स्वयंसेवकों ने उनकी काफी मदद की और पेयजल, चाय आदि की व्यवस्था की।
इस सोमवार माता अन्नपूर्णा के मिले दर्शन
आम तौर पर श्री काशी विश्वनाथ और माता अन्नपूर्णा से जुड़े कोई विशेष पर्व होते हैं तो दोनों मंदिरों में एक साथ दर्शन कर लेना मुश्किल हो जाता है। भक्तों को अलग-अलग कतारों से जाने में काफी समय लग जाता है और असुविधा भी होती है। लेकिन श्रावण मास के तीसरे सोमवार को भक्तों को थोड़ी देर के लिये समय-समय पर राहत मिली और काशी विश्वनाथ के साथ माता अन्नपूर्णा के भी दर्शन हुए। सुबह और सायंकाल कुछ घंटों के लिये भक्तों को अन्नपूर्णा मंदिर जाने के लिये रास्ता खोला गया।
हर-हर महादेवके बीच भक्तोंने बाबाका किया जलाभिषेक
सावन के तीसरे सोमवार को जनपद के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के बीच जलाभिषेक कर दर्शन पूजन किया और देश में सुख शाति की कामना की। श्रद्धालुओं ने सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव, माधोपुर स्थित श्री शूलटंकेश्वर महादेव, रेवड़ीतालाब स्थित तिलभाण्डेश्वर महादेव, केदारघाट स्थित श्री केदारेश्वर महादेव, गायघाट स्थित त्रिलोचन महादेव, कोयाला बाजार स्थित श्री ओंकारेश्वर महादेव,  नरहरिपुरा स्थित श्री जागेश्वर महादेव, दारानगर स्थित श्री महामृत्युुंजय महादेव एवं बीएचयू परिसर स्थित विश्वनाथ जी मंदिर दर्शनार्थियों ने बाबा का जलाभिषेक कर दर्शन पूजन किया। श्रावणी सोमवार के कारण शिवालयों को फूल मालाओं एवं झालर बत्तियों से आकर्षक सजावट की गयी थी। दर्शनार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर शिव मंदिरों के आस पास पुलिस एवं पीएसी की डयूटी लगायी गयी थी। सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव के दर्शन के लिए सुबह से ही दूरदराज सेे आये भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक कर उन्हें विल्वपत्र,  मालाफूल, फल मिष्ठïान चढ़ाकर विधिवत पूजन किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पिकनिक स्थल सारनाथ का भ्रमण भी किया। इसी प्रकार दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव एवं नरहरिपुरा में श्री जागेश्वर महादेव का शिवभक्तों ने दर्शन पूजन किया। मंदिर में सायंकाल भजन कीर्तन का एवं रात्रि में सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया। इसके पूर्व सायंकाल श्री जागेश्वर महादेव का गुलाब, गेंदा, बेला एवं अन्य फूल पत्तियों  से भव्य श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात मंदिर के महंत स्वामी मधुरकृष्ण ने बाबा को भोग लगाकर महाआरती की। इसके बाद भक्तों में प्रसाद वितरित किया। इन मंंदिरों क विद्युत झालरों से आकर्षक सजावट भी की गयी थी। इसी क्रम में श्री शूलटंकेश्वर महादेव का भी महिलाओं एवं  पुरुषों ने जलाभिषेक कर दर्शन पूजन किया। यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सावनके सोमवार पर त्रिलोचन महादेव, ओंकारेश्वर महादेव तथा श्री अग्निवेश महाराज द्वारा स्थापित श्री ब्रहाण्डेश्वर महादेव मंदिरों में दर्शनार्थियों की सुबह से ही दर्शन पूजन का क्रम जारी रहा। श्रावणी सोमवार को देखते हुए मंदिरों को फूल मालाओं एवं लाइटों से सजाया गया था। इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े प्रबन्ध किये गये थे।