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मुलायम 'सेक्युलर मोर्चा' बनानेकी राह पर

लखनऊ। समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव और उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव अपने पुराने संगठन लोकदल के बैनर तले एक 'सेक्युलर मोर्चाÓ बना सकते हैं। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने यह दावा किया है। सपा के शनिवार को होने वाले प्रान्तीय अधिवेशन से पहले पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुखालिफ शिवपाल धड़े की सक्रियता बढ़ गयी है और कल ही मुलायम की अध्यक्षता वाले लोहिया ट्रस्ट के सचिव पद से अखिलेश के प्रमुख सलाहकार रामगोपाल यादव को हटा दिया गया। साथ ही मुलायम के आगामी २५ सितम्बर को प्रेस कांफ्रेंस करने के शिवपाल के एलान के बाद ऐसी अटकलें जोरों पर हैं कि अब मुलायम और शिवपाल सपा छोड़कर अलग रास्ता अपनायेंगे। शिवपाल काफी पहले से ही मुलायम की अगुवाई में 'समाजवादी सेक्युलर मोर्चाÓ के गठन की बात कह रहे हैं लेकिन यह अभी तक वजूद में नहीं आया है। इस बीच लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने बातचीत में दावा किया कि मुलायम और शिवपाल उनके साथ होंगे और मिलकर एक सेक्युलर मोर्चा बनायेंगे। सोमवार को होने वाली मुलायम की प्रेस कांफ्रेंस में वह भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। मालूम हो कि मुलायम कभी लोकदल के भी संस्थापक सदस्य थे। सिंह ने कहा कि उन्होंने शिवपाल से बात की है और शुरूआत में यह प्रयास होगा कि सेक्युलर मोर्चे का गठन लोकदल के बैनर तले हो। सिंह का यह दावा शिवपाल के उस बयान की रोशनी में अहमियत रखता है, जिसमें उन्होंने गत जून में 'साम्प्रदायिक शक्तियों से लडऩे के लियेÓ समाजवादी सेक्युलर मोर्चा गठित करने का इरादा जताया था। शिवपाल के एक करीबी नेता ने बताया कि चूंकि सपा अध्यक्ष अखिलेश और शिवपाल खेमों के बीच सुलह-समझौते की गुंजाइश अब बाकी नहीं दिख रही है, लिहाजा शिवपाल को अपने भविष्य के बारे में फैसला करना ही होगा और सेक्युलर मोर्चा अब बनकर रहेगा। मुलायम और शिवपाल के लोकदल के बैनर तले काम करने के सुनील सिंह के दावे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, नेताजी(मुलायम) समाजवादी शब्द को तो नहीं छोडऩा चाहेंगे। सोमवार को सारी स्थिति साफ हो जायेगी, जब नेताजी अपने भविष्य की रणनीति का खुलासा करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी संभावना जताई कि अगर मुलायम ऐन वक्त पर अपनी प्रेस कांफ्रेंस का कार्यक्रम निरस्त कर दें, तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। चुनाव आयोग के रिकार्ड के मुताबिक लोकदल एक पंजीकृत और गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसकी स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह ने वर्ष १९८० में की थी और मुलायम उसके संस्थापक सदस्य थे। प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त जब सपा में अन्तर्कलह चरम पर थी और मुलायम ने खुद को पार्टी के मामलों से लगभग अलग कर लिया था, उस वक्त भी उनके अलग पार्टी बनाकर चुनाव लडऩे की अटकलें लगायी जा रही थी। उस समय भी लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने उनसे अपनी पार्टी के निशान पर चुनाव लडऩे की पेशकश की थी। सिंह के मुताबिक बड़ी संख्या में शिवपाल के समर्थकों ने लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा था और पार्टी ने अपनी चुनाव प्रचार सामग्री में मुलायम की तस्वीर का इस्तेमाल किया था। सपा का प्रान्तीय अधिवेशन २३ सितम्बर को जबकि राष्ट्रीय अधिवेशन आगामी पांच अक्तूबर को होगा। इन दोनों ही कार्यक्रमों में शिवपाल और मुलायम को आमंत्रित नहीं किया गया है।
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लालू, तेजस्वी को फिर समन
नयी दिल्ली (आससे)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रेलवे टेंडर घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव को एक बार फिर से समन जारी किया है। लालू   को २५ सितंबर और  तेजस्वी को २६ सितंबर को सीबीआई के सामने पेश होना है। मालूम हो कि लालू और तेजस्वी पर होटल के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप है। जांच एजेंसी ने इससे पहले भी दोनों को  आईआरसीटीसी से जुड़े घोटाले में समन जारी किया था। इस मामले में लालू को ११ सितंबर और तेजस्वी को १२ सितंबर को पेश होने के लिये कहा गया था। लेकिन दोनों नेता कारण बताकर पेश नहीं हो सके थे। लालू ने रांची की अदालत में चल रहे मामले को कारण बताया था जबकि तेजस्वी ने अपनी पूर्व निर्धारित राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के कारण पेश होने में असमर्थता व्यक्त की थी।  
 मालूम हो कि यह मामला वर्ष २००६ में रेलवे में होटल आवंटन में गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। उस समय लालू रेलमंत्री थे। सीबीआई के अनुसार, लालू ने रांची और पुरी के रेलवे के हेरिटेज बीएनआर होटलों के रखरखाव के लिये निजी कंपनियों को टेंडर दिया था।उसी वर्ष इन होटलाों को आईआरसीटीसी ने अपने नियंत्रण में लिया था।