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जौनपुर में बाउंड्रीवाल गिरने से तीन बच्चोंकी मौत

जौनपुर। जलालपुर थाना क्षेत्र के रेहटी गांव में शुक्रवार को दिन में जेसीबी के धक्के से बाउंड्रीवाल गिरने से तीन बच्चों की मौत हो गयी। जानकारी के अनुसार बल्ला यादव अपने बाउंड्रीवाल के अन्दर बालू गिरवाये थे। बालू जेसीबी लगाकर हटवा रहे थे कि जेसीबी के धक्के से बाउंड्रीवाल की दीवार गिर गयी। बाउंड्री वाल के पीछे 3 बच्चे ८ वर्षीय आयुष पुत्र रिंकू राजभर, ६ वर्षीय हरीश पुत्र इरफान, ८ वर्षीय असरद पुत्र आफताब तथा ६ वर्षीय शिवराजभर पुत्र सोनू राजभर खेल रहे थे कि दीवाल की चपेट में आ गये। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने स्थानीय थाने पर सूचना देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेहटी ले गये जहां पर प्राथमिक उपचार के बाद चारों बच्चों की गम्भीरावस्था को देखते हुए डाक्टरों की टीम ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस इंस्पेक्टर देवतानन्द सिंह ने चालक सहित जेसीबी को अपने कब्जे में ले लिया। तीनों बच्चों की मौत सुन परिजनों में कोहराम मच गया तथा गांव में शोक की लहर फैल गई। इस मौके पर एसडीएम केराकत भी मौजूद रहे। वहीं तीन बच्चों की मौत ने गांव के व परिजनों को झकझोर     दिया। जिससे पूरे गांव में मातम पसरा है। मौके पर जुटी भीड़ जेसीबी चालक व मकान मालिक पर लापरवाही का आरोप लगा रही है। आसपास के लोगों की चर्चा के मुताबिक जिस दिन ट्रक से बालू गिराया गया था उसी दिन बाउंड्री की दीवाल ट्रक के धक्के से टूट गयी थी लेकिन जेसीबी चालक ने लापरवाही दिखाते हुए उसी टूटी दीवाल के अंदर ही बालू रखना शुरु कर दिया। जिससे इतनी बड़ी घटना हो गयी। परिजनों ने कहा कि अगर जेसीबी चालक बच्चों को वहां से हटाकर कार्य करता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। घटना में मृत आठ वर्षीय आयुष अपने मां-बाप का इकलौता पुत्र था। उसकी एक बहन सोनाली जो ननिहाल में नाना के घर रहकर पढ़ाई करती है जबकि पिता बाजार की दुकान पर प्राइवेट मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। वंही असजद भी अपने मां बाप का इकलौता बेटा था। असजद चार बहने १२ वर्षीय आलफिन, १० वर्षीय अमरीन, ६ वर्षीय आपसा, २ वर्षीय अजरा में अकेला भाई था। असजद के पिता मुम्बई में अपना व्यापार करते हुए परिवार का भरण पोषण करते हैं। तीसरा मृत बच्चा हारिश दो भाई में बड़ा था। एक भाई अभी अबोध है। इनके पिता त्रिलोचन बाजार में मेडिकल स्टोर चलाकर परिवार चलाते हैं। इस घटना के बाद से गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।