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दैनिक मंडी समीक्षा

नयी दिल्ली। फ्लोर मिलों की मांग कमजोर होने से लारेंस रोड पर गेहूं के भाव 10 रुपए घट गये। दाल मिलों की मांग घटने से चना-मसूर के भाव 25/75 रुपए नीचे आ गये। मांग के अभाव में काबली चना भी 100 रुपए घट गया। जबकि स्टॉकिस्टों की बिकवाली कमजोर होने से गुड़-शक्कर के भाव 100/150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर बोले गये। चीनी में भी 25/75 रुपए की और तेजी दर्ज की गयी। इसके विपरीत खाद्य तेलों में मांग कमजोर होने से सोया तेल 50 रुपए व सरसों सीड के भाव 25/50 रुपए टूट गये। किराने में स्टॉकिस्टों की बिकवाली से जीरा 200 रुपए टूट गया। सीमित बिकवाली से कालीमिर्च 5 रुपए सुर्ख हो गयी। त्योहारी मांग से केसर भी 10 रुपए प्रति ग्राम तेज हो गया। उठाव न होने से मगज तरबूज एक रुपया नरम रहा। मेवों में ग्राहकी न होने से कारोबार कमजोर रहा।
अनाज-दाल-आटा मिलों की मांग कमजोर होने से लारेंस रोड पर गेहूं 10 रुपए घटकर 2025/2035 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। आटा, मैदा, सूजी में भी उठाव न होने से नरमी का रुख रहा। ग्राहकी कमजोर होने से काबली चना 100 रुपए गिरकर 4600/5100 रुपए पर आ गया। दाल मिलों की मांग कमजोर होने एवं वायदा नरम हो जाने से देशी चना 4200/4225 से घटकर 4125/4150 रुपए रह गया। सहानुभूति में चना दाल भी 50 रुपए गिरकर 4700/4900 रुपए रह गयी। उठाव न होने से मसूर देशी बिल्टी माल के भाव 50 रुपए घटकर 3975/4000 रुपए रह गये। अन्य दलहनों में भी मांग कमजोर होने से कारोबार ढीला रहा।
तेल-तिलहन-ऊंचे भाव पर तेल मिलों की मांग घटने से लारेंस रोड पर सरसों 25/50 रुपए घटकर 4150/4225 रुपए प्रति क्विंटल रह गयी। सरसों तेल भी उठाव न होने से 8650 रुपए पर सुस्त रहा। सोया तेल, लिवाली कमजोर होने से 50 रुपए गिरकर 7900 रुपए पर आ गया। कांदला में इसके भाव 7180 रुपए रह गये। जबकि छिटपुट मांग बनी रहने से बिनौला तेल व राइसब्रान ऑयल की कीमतें पूर्वस्तर पर स्थिर रहीं। अखाद्य तेलों में औद्योगिक मांग निकलने से अरंडी तेल 100 रुपए बढ़कर 9500/9600 रुपए हो गया।
गुड़-चीनी-आगामी त्योहारी मांग तथा सरकारी नीति के कारण मिलों द्वारा ऊंचे भाव बोले जाने से चीनी 50 रुपए और बढ़कर मिल डिलीवरी 3250/3420 रुपए तथा हाजिर भाव 3550/3700 रुपए हो गये। स्टॉकिस्टों की बिकवाली कमजोर होने से गुड़ के भाव 100/150 रुपए बढ़कर 3400/3800 रुपए प्रति क्विंटल हो गये। सीमित बिकवाली से शक्कर भी 100 रुपए बढ़कर 3900/4000 रुपए हो गयी। खांडसारी में भी मजबूती रही।
किराना-मेवे-त्योहारी खपत एवं निर्यात मांग को देखते हुए केसर 10 रुपए बढ़कर ईरानी 80/90 रुपए, कश्मीरी 95/105 एवं बेबी केसर के भाव 135 रुपए प्रति ग्राम हो गये। आवक नगण्य रह जाने और उठाव अच्छा होने से कालीमिर्च मरकरा पांच रुपए बढ़कर 380/385 रुपए किलो हो गयी। आयात महंगा पडऩे से जावित्री पीली भी 25 रुपए भी 1350/1375  रुपए किलो बोली जा रही थी। जबकि केरल की मंडियों से दागी माल आने और उठाव कमजोर होने से जावित्री लाल 70/90 रुपए टूटकर 1060/1650 रुपए किलो पर आ गयी। जायफल भी 20 रुपए घटकर 610/615 रुपए किलो रह गया। डिब्बे में जीरा काफी टूटने से यहां भी 200 रुपए घटाकर एवरेज माल के भाव 19600/19700 रुपए क्विंटल कर दिये गये। मगज तरबूज भी एक रुपया किलो मुलायम रहा। मेवों में ग्राहकी कमजोर होने से पूर्वस्तर पर व्यापार सुस्त रहा।
सर्राफा बाजार-विदेशों के तेज समाचार आने तथा ग्राहकी निकलने से सर्राफा बाजार में सोने के भाव 180 रुपए प्रति 10 ग्राम बढ़ गये। चांदी में भी तेजी का रुख रहा। अंतर्राष्टï्रीय बाजार में सोने के भाव तीन डॉलर बढ़कर 1196 डॉलर प्रति औंस हो जाने तथा आभूषण निर्माताओं की मांग निकलने से सोना 180 रुपए बढ़कर किलोबार 31450 रुपए तथा स्टैंडर्ड के भाव 31600 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गये। विदेशों में चांदी के भाव 5 सेंट बढ़कर 1408 सेंट प्रति औंस हो जाने तथा औद्योगिक मांग बढऩे से चांदी हाजिर के भाव 37500 से बढ़कर 37680 रुपए प्रति किलो हो गये। सटोरिया लिवाली बढऩे से चांदी वायदा 36995 से बढ़कर 37200 रुपए प्रति किलो हो गया। सीमित बिकवाली के कारण चांदी सिक्के के भाव भी 720/730 रुपए प्रति नग पर मजबूत रहे।
अंबानी की गैस पाइपलाइन कंपनी को खरीदेगी ब्रुकफील्ड
कनाडा की वित्तीय कंपनी ब्रुकफील्ड 14 हजार करोड़ रुपए में ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन (ईडब्ल्यूपीएल) के स्वामित्व वाली गैस पाइपलाइन (जिसे पहले रिलायंस गैस ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम से जाना जाता था) को खरीदने के लिए तैयार है। इस तरह से कनाडा की फर्म की तरफ से भारतीय तेल व गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में यह पहला अधिग्रहण होगा। सूत्रों के अनुसार भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने पिछले हफ्ते इस लेनदेन को मंजूरी दी है। ब्रुकफील्ड ने आधारभूत संरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) को पंजीकृत करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ एक आवेदन भी दायर किया है जिसे इसी महीने मंजूरी मिल सकती है। 1,400 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवर्तक मुकेश अंबानी की होल्डिंग कंपनी के पास है, जो आंध्र तट पर काकीनाड़ा को गुजरात के भरुच को जोड़ती है। कृष्णा गोदावरी डी-6 बेसिन पर रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी और निको रिसोर्सेस की संयुक्त उद्यम परियोजना के लिए यह पाइपलाइन महत्वपूर्ण होगी, जो साल 2020 में उत्पादन बढ़ा सकती है। ईडब्ल्यूपीएल अन्य गैस स्रोतों मसलन आरएलएनजी (रीगैसीफाइड लिक्विफाइड नैचुरल गैस) टर्मिनल समेत अन्य के गैस परिवहन की जरूरतें भी पूरी करती है।
यह पाइपलाइन अन्य ऑपरेटरों जैसे गेल और गुजरात स्टेट पेट्रोनेट के साथ जुड़ी हुई है जो देश के अन्य इलाकों में गैस की डिलिवरी के लिए है।